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11:17 PM

बगीचे में अजनबी को सबक || Hindi Stories For Kids || Moral Story

बगीचे में अजनबी को सबक || Hindi Stories For Kids

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एक बार की बात है एक आदमी था जिसके पास एक बड़ा बगीचा था। उन्होंने कई फलों के पेड़ लगाए थे और उनकी देखभाल तब तक की थी जब तक वे फल नहीं खाते। अब वह फलों को उठाना चाहता था और उन्हें बेचने के लिए अपने परिवार के लिए पैसा कमाता था। एक दिन अपने बेटे के साथ फल लेने के दौरान, आदमी ने एक अजनबी को पेड़ की शाखा पर बैठकर फल उठाते देखा।


यह आदमी क्रोधित हो गया और चिल्लाया, “अरे तुम! तुम मेरे पेड़ पर क्या कर रहे हो? आपको दिन में फल चुराने में शर्म नहीं आती है? ”शाखा के अजनबी ने माली की तरफ देखा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और फल उठाता रहा। माली बहुत गुस्से में था और फिर से चिल्लाया, "पूरे साल मैंने इन पेड़ों की देखभाल की है, आपको मेरी अनुमति के बिना फल लेने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए एक बार में नीचे आ जाओ!"


पेड़ पर चढ़े अजनबी ने जवाब दिया, “मुझे नीचे क्यों आना चाहिए? यह ईश्वर का बगीचा है और मैं ईश्वर का सेवक हूं, इसलिए मुझे इन फलों को लेने का अधिकार है और आपको ईश्वर और उसके सेवक के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ”माली इस जवाब पर बहुत हैरान हुआ और उसने सोचा। योजना। उन्होंने अपने बेटे को बुलाया और कहा, "एक रस्सी ले आओ और इस आदमी को पेड़ से नीचे उतारो।" उसका बेटा रस्सी लाया और माली ने उसे अजनबी को पेड़ से बांधने का आदेश दिया। माली ने फिर एक छड़ी ली और अजनबी को पीटना शुरू कर दिया। अजनबी चीखने लगा। “तुम मुझे क्यों मार रहे हो? आपको ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। ”

माली ने कोई ध्यान नहीं दिया और उसकी पिटाई जारी रखी। अजनबी चिल्लाया, "क्या तुम भगवान से नहीं डरते, तुम एक निर्दोष आदमी को पीट रहे हो?" माली ने उत्तर दिया, “मुझे क्यों डरना चाहिए? मेरे हाथ में यह लकड़ी भगवान की है और मैं भी भगवान का सेवक हूं, इसलिए मुझे डरने की कोई बात नहीं है, और आपको भगवान और उनके नौकर के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ”अजनबी घबरा गया और फिर बोला,“ रुको रुको। 'मुझे मत मारो, मुझे फल लेने के लिए खेद है। यह आपका बगीचा है और मुझे फल लेने से पहले आपकी अनुमति लेनी चाहिए। इसलिए, कृपया क्षमा करें और मुझे आज़ाद करें। "

माली ने मुस्कुराते हुए कहा, "जब से तुम्हें अब अपनी गलती का एहसास हुआ है, मैं तुम्हें माफ कर दूंगा लेकिन याद रखना कि भगवान ने अपने सभी नौकरों को दिमाग दिया है, इसलिए हर व्यक्ति के कर्म अपने हाथों में होते हैं।" ।

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9:01 AM

Vikram Betal || Short Stories For Kids In English || Moral Stories for Kids

  Vikram Betaal  || Short Stories For Kids In English || Moral Stories for Kids  

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It's a matter of time. A king was ruling in Kushinagar village. A Brahmin lived in Kushinagar village, of which four sons Brahman died when the sons grew up and the Brahmani became sati with him. His ridders took away all the money. The four brothers went to their maternal grandfather's house.

But after some time they started having bad behavior. Then everyone together thought that we should learn any science. Thinking that all the brothers went in different directions. After some time, the four brothers got their education back. 

One brother said, "have learned such teachings that any dead animal can have meat on the bones". The other brother said, "I can have skins and hair on top of it". The third brother said, "I can make all the organs of that creature in." The youngest brother said, "I can put him into life."

Then the four brothers went to the forest to test their teachings. They found the dead lions bone. They lifted all those bones without recognizing them. First time the brother put the month. The other brother made skins and hair. The third brother made all the organs.
The fourth brother put his life in it. The lion came to life and ate everyone. Tell me, who did the crime of making lions in those four? "
The king said, "The one who killed the soul, because the other three did not know that they were making lions. That's why they have no defect. "

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Megical Ox || Best Stories For Kids 




12:26 AM

भूतिया कुआं।। Short Stories For Kids In Hindi

   भूतिया कुआं।। Short Stories For Kids   

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यह कहानी हैं दो छोटे बच्चे हर्ष और माधुरी की। एक दिन की बात है माधुरी आवाज दे-देकर हर्ष-हर्ष बोल रही थी तभी हर्ष अचानक उसके सामने आकर माधुरी को डरा देता हैं। इसके बाद डरा कर भागता हुआ बोलता है मधुरा डरपोक मधुरा डरपोक हैं। इसके बाद मधुरा सोचती है रुको आज में तुम्हे मजा छका कर ही रहूंगी।
तभी उसकी मम्मी आती है और बोलती है क्या हुआ रुक जाओ दोनों तो मधुरा बोलती है की ये हर्ष का बच्चा मुझे सता रहा हैं। 

इसके बाद हर्ष बोलता हैं - नही, माँ माधुरी डरपोक हैं। 

माधुरी बोलती है - नहीं, माँ ऐसी कोई बात नहीं हैं। 

फिर हर्ष बोलता है - में अँधेरे कमरे में था तो माधुरी वह आयी तो मैंने उससे अचानक डराया तो मधुरा दर गयी। 

इसके बाद माँ ये सारी बात सुन लेती है और बोलती है की आज में तुमको एक डरावनी कहानी सुनाती हु। इसके बाद हर्ष खुश और माधुरी डर जाती है तो माँ बोलती है डरने की बात नहीं है यह एक कहानी तुम्हारे लिए ही  है।
एक समय की बात है किसी गांव में एक भूतिया कुआं था।  उस गांव के सभी लोग कुए के आस-पास भी भटकने से डरते थे। उस  कुएं के पास एक बरगद का पेड़ था। गांव के सभी लोग मिलकर उस कुएं के के बारे में डरावनी कहानियां सुनाया करते थे। गांव के बुड्ढे बच्चे जवान सभी उसे कुए के पास जाने से डरते शिवाय एक आदमी के जिसका नाम था- शंभू लोहार।

 शंभू लोहार एक बहुत ही मेहनती आदमी था।  वह दिन भर लोहे को पीट-पीटकर नए औजार बनाया करता था। एक दिन  शंभू अपने दो दोस्तों के साथ बैठा बातें कर रहा था तभी शंभू का एक दोस्त बोलता है- सुना है आजकल भूतिया कुए ने एक आदमी की जान ले ली, दूसरा दोस्त बोलता है- पता नहीं, उस कुआं में ऐसा क्या है।

शंभू बोलता है- भूत-वूत कुछ भी नहीं होता है यह मन से बनाई हुई कहानियां है।

सम्भु का दोस्त बोलता है -  तुम बहुत साहसी हो अगर तुमको ऐसा लगता है तो इस को सिद्ध करके बताओ कि भूत कुछ भी नहीं होते हैं और बोलता है आज शर्त लगा ही लेते हैं। 

शंभू बोलता है - हां जरूर क्यों नहीं, मैं इस को सिद्ध करके ही बताऊंगा और बोलता है- बताओ क्या शर्त है। 

 शंभू का दोस्त - तुम्हें आधी रात को उस कुएं के पास जाना होगा और उसके पास जो बरगद का पेड़ है उसके एक डाल तोड़ कर लेकर आनी होगी।

शंभू का दूसरा दोस्त - अगर तुम अपना काम कर पाए तो उसी डाल को तोड़ कर लाने के ₹500 देंगे।

शंभू बोलता है - अरे वाह, इससे तो मेरे पूरे महीने का राशन का सामान आ जाएगा और बोला मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है।

उस रात जैसा तय हुआ था रात को तीनों मित्र चौराहे पर गए। चौराहे पर जाकर दोनों मित्रों ने बोला कि यहां से आगे अब तुम्हें ही जाना है हम यहां तुम्हारी प्रतीक्षा करेंगे। इसके बाद  शंभू चौराहे से  भूतिया कुआं की ओर आगे निकल पड़ा। वैसे ही रात बहुत हो चुकी थी तो अंधेरा का बहुत गहरा था। जंगल में  जाते ही जंगली जानवरों की आवाज आ रही थी। उसी समय संभू को कुछ चमगादड़ की आवाजें सुनाई दे तो वह डर गया लेकिन वह रुका नहीं आगे बढ़ गया। वह चलता रहा और भूतिया कुआं के पास चला गया। शंभू बरगद के पेड़ के पास गया और डाली तोड़ने लगा तभी उसको पेड़ के अंदर एक दो आखे वाली चीज देखी तो वह बहुत डर गया और वह दो आँखे वाली चीज बाहर निकलकर उड़ने लगी तो देखा कि वह उल्लू है। शंभू ने डाली को तोड़ दिया और वह उस चौराहे पर गया जहां उसके मित्र उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे और बोला- देख लो मैंने साबित कर दिया।  उसके दोनों मित्रों ने बोला- क्या भूत ने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया।
 इस बात का सब्बू बोला- अगर भूत होता तो कुछ करता ना, वह सिर्फ एक उल्लू था जिसे देख कर लोग भूत समझ बैठते थे और उससे  ₹500 ले लिए और वह बहुत खुश हुआ। 

    शिक्षा [Moral Stories]    

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की भूत-वूत कुछ नहीं होता है दरसल यह हमारे मन का बहम होता है जिसे हम ही बढ़ावा देते हैं। अतः हमें कभी किसी से नहीं डरना चाइये। 

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8:18 AM

जादुई बैल || Best Stories For Kids In Hindi - Stories For You

जादुई  बैल || Best Story For Kids In Hindi - Stories For You

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Megical Bull 

यह कहानी है भोला और उसके बैल की| भोला एक किसान था और उसके पास एक छोटा-सा खेत था| उस खेत में जहां वो मेहनत कर फसल उगाता था| भोला के पास खेती करने के लिए एक बैल जिसका नाम कल्लु  था| कल्लु खेत में हल चलाता था| दिन भर मेहनत करने के बाद भोला कल्लू के पास बैठ कर बात किया करता था| भोला बहुत ही खुश और संतुष्ट था लेकिन भुला की खुशी उसके पड़ोसी शंकर से देखी नहीं जाती थी| शंकर वैसे तो बहुत ही अमीर था उसका खेत भी बहुत बड़ा था और उसके पास खेत जोतने के लिए एक ट्रैक्टर भी था|   शंकर सोचता था कि आखिर भोला इतनी छोटी सी जमीन पर खेती करके भी इतना खुशी कैसे रह सकता है|  मेरे पास इतनी सारी जमीन होने के बावजूद भी खेत में फसल उगाता हूं और फसल के द्वारा मिलने वाले पैसों से संतुष्ट नहीं रह पाता|


शंकर सोचता है कि शायद यह बैल कल्लू उसकी खुशी का कारण है और जब देखो वह उस बैल कल्लू से बात करता रहता है| एक दिन शंकर भोला के पास गया और बोला बोला भाई मुझे एक बेल खरीदना है|


भोला-  भाई, लेकिन भाई आपके पास तो ट्रैक्टर है|


शंकर-  हां, वह तो ठीक है लेकिन ट्रैक्टर  से सारा काम तो नहीं कर सकते हैं,  तो सोच रहा हूं कि एक बेल भी खरीद लू|

भोला-  हां भाई तो आप बैल जरूर खरीदिये|


शंकर-  हां, लेकिन मुझे तुम्हारा बेल बहुत पसंद है क्या तुम इसे बेचना पसंद करोगे और बोला मैं तुम्हें इसके अच्छे दाम दूंगा| 


 भोला-  नहीं-नहीं भाई, बुरा मत मानिए लेकिन मुझे अपना बैल नहीं बेचना है, आप कृपा करके कोई दूसरा बेल खरीद लीजिए|


शंकर अपने खेत लौटाया और वह सोचने लगा-  हो या ना हो इसके बेल में कुछ ना कुछ बात जरूर है लेकिन मैं इस बेल को पाकर ही रहूंगा| शंकर सोचता है, अगर इसकी खेती ही नहीं रहेगी तो इसको अपना बेल मुझे भेजना ही पड़ेगा| एक रात शंकर ने चुप-कर भोला का सारा खेत जला डाला| अगले दिन जब बोला ने अपने खेत देखें तो फूट-फूट कर रोने लगा और रोते हुए बोला- "हे भगवान यह आपने क्या कर डाला" रे| शंकर भोला की यह अवस्था देखकर बहुत ही खुश था और बोला- अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे| कई दिन बीत जाने के बाद भोला अपने पास जमा पैसे गिन रहा था, 6.... 7..... 8..... 9 ..... 10.... बस  और सोचने लगा मेरे पास तो 10 ही चांदी के सिक्के हैं| इससे तो कुछ दिन हो रही मेरा खर्चा चल पाएगा| 


भोला सोचता है- मुझे कल्लू को किसी नए मालिक को बेच देना चाहिए आखिर नया मालिक उसको पेट भर के भोजन तो खिला पाएगा| अगले दिन भोला कल्लु को लेकर बाजार की ओर निकल पड़ा| भोला के हाथ में पैसों की पोटली थी और  सोच रहा था कि मेरे पास केवल 10 चांदी के सिक्के हैं और अगर यह भी कोई लूट ले तो कुछ नहीं बचेगा, बेहतर यह है कि मैं इस पोटली को कल्लू के गले में बांध लूं|  भोला ने पैसों की  पोटली कल्लू के गले में बांध दी| 
कुछ दूर चल कर भोला एक भोजनालय पर रुका भोजनालय पर भोला ने कुछ खाने का निर्णय लिया|  इसके बाद कल्लू को भोला  ने एक पेड़ पर बांध दिया| जब भोला खाना खा रहा था तभी भोजनालय का मालिक बाहर आया और कल्लू की ओर  देख ही रहा था कि कल्लू के गले से एक चांदी का सिक्का नीचे गिरा| भोजनालय का मालिक चौक गया और सोचा कि अरे क्या चांदी का सिक्का देने वाला बेल| उसी क्षण बेल के गले से दूसरा चांदी का सिक्का नीचे गिरा| भोजनालय का मालिक सोचा कि यह तो जादुई  बेल है| भोजनालय का मालिक सोचा कि शायद इस बेल के बारे में मालिक को नहीं पता है| भोला ने खाना खा लिया और बेल की ओर जाकर रस्सी खोलने लगा तो भोजनालय का मालिक वहां आया और भोला को बोला|

भोलनालय मालिक- क्या आप इस बेल को बेचना चाहते हैं|

भोला- हां, क्या आपको इसको खरीदना है|  

भोजनालय मालिक- हां-हां, मैं इस बेल के बदले में आपको हजार चांदी के सिक्के दूंगा|

 भोला- इतने सारे चांदी के सिक्के की मांग पर चौक में पड़ गया और बोला ठीक है, सौदा पक्का है| 


इसके बाद मालिक ने हजार चांदी के सिक्के बोला को दे दिए और बेल को ले लिया| इसके बाद भोला सिक्के लेकर मंडी में गया और उसने चांदी के सिक्कों से 4 गए खरीद ली और अपने घर ले आया| इसके बाद भोला दूध का व्यवसाय करने लगा| धीरे धीरे भोला अमीर हो गया|  और उसका पड़ोसी शंकर धीरे-धीरे ईर्ष्या के मारे जलने लगा| इस प्रकार भोला  का बैल उसके लिए जादुई साबित हुआ|

शिक्षा [Moral ]- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए| 

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